62 करोड़ से बनी मत्स्य मंडी शुरू होने से पहले विवादों में घिरी

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दुकान पर 15 से 18 लाख लगाना मुश्किल, बाहरी को मौका देने का आरोप 

चंदौली, जिले में 62 करोड़ की लागत से बनी एशिया की सबसे बड़ी नई मत्स्य मंडी शुरू होने से पहले ही दुकानों के आवंटन को लेकर विवादों से घिर गई. किसानों ने आरोप लगाया है कि मंडी उनके लिए बनाई गई है, लेकिन मौका बाहरी लोगों को दिया जा रहा है, जिससे वे नाराज हैं. कहा छोटे किसानों के लिए दुकान पर 15 से 18 लाख लगाना मुश्किल है. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दिया जाए.

आवंटन पर विवाद
दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर किसानों में नाराजगी है और वे इसके विरोध में हैं. उन्होंने बताया उद्घाटन के दौरान बताया गया था कि यह मंडी मछली पालन से जुड़े सभी संसाधनों (बीज, फीड, दवाएं, चारा, उपकरण) का केंद्र होगा और यहां होलसेल व रिटेल मार्केट, आधुनिक तकनीकें, मार्केटिंग, एक्सपोर्ट, और एक फिश रेस्टोरेंट भी होगा.
छोटे किसानों के लिए दुकान पर 15 से 18 लाख लगाना मुश्किल
प्रगतिशील किसान रतन सिंह ने कहा कि मंडी में एक दुकान के लिए 15 से 18 लाख रुपए की कीमत तय की गई है, जो छोटे मत्स्य पालकों के लिए इतनी बड़ी रकम जुटा पाना मुश्किल है. शासन को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. वहीं बर्थरा के मत्स्य पालक मदनजीत सिंह ने कहा कि मंडी में मछलियों की प्रोसेसिंग की कोई व्यवस्था नहीं है और दुकानों का रेट भी बहुत ज्यादा है, जिससे स्थानीय किसानों को कोई खास लाभ नहीं मिलेगा.
किसानों को सीधा लाभ मिले
एफपीओ को जोड़ने की मांगइशानी एग्रो एफपीओ के संचालक अजय सिंह ने कहा कि उनके संगठन में एक हजार से ज्यादा किसान जुड़े हैं. अगर मंडी संचालन में एफपीओ की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो किसानों को सीधा लाभ मिलेगा.
आरोप निराधार 
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने कहा कि मंडी में दुकानों का आवंटन पारदर्शी ढंग से होगा. कुछ लोग राजनीतिक द्वेष के चलते गलत अफवाहें फैला रहे हैं. जो निराधार है. स्थानीय किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके. इसके लिए उच्चाधिकारियों से बात की जायेगी.
स्थानीय किसानों को 80 प्रतिशत आवंटन 
चकिया विधायक कैलाश खरवार ने कहा, “यह मंडी स्थानीय लोगों के हित में बनी है, इसलिए 80% दुकानों का आवंटन स्थानीय किसानों को ही करने का प्रयास किया जाएगा।”

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