मायावती छठवीं बार चुनी गई बसपा चीफ

भतीजा आकाश बने रहेंगे राष्ट्रीय संयोजक
लखनऊ। राजधानी के बसपा मुख्यालय पर मंगलवार को बसपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई. बैठक में देश और प्रदेश के पदाधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में मायावती को एक बार फिर सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया. वे अगले पांच सालों तक पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी रहेंगी.मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद राष्ट्रीय संयोजक बने रहेंगे.मायावती 2003 से लगातार पार्टी की अध्यक्ष चुनी जा रही हैं.
बसपा के पूर्व मंत्री गयादीन दिनकर ने बताया कि लखनऊ के बसपा मुख्यालय में हुई बैठक में प्रदेश के सभी पदाधिकारी के साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी शामिल रहे. जिनके साथ चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा की गई. वहीं उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी कार्य योजना बनाई गई.
आकाश आनंद के राष्ट्रीय संयोजक होने के साथ ही अन्य जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर डाली गई हैं. उन्हें कई जगहों का प्रभारी बनाया गया है. इस मौके पर मायावती ने एक बुकलेट भी जारी की है जो सभी पदाधिकारियों को दी गई. जिसमें किन मुद्दों को लेकर आगामी चुनाव में बसपा उतरेगी उसकी जानकारी दी गई है.
मायावती के सामने चुनौतियों का पहाड़
आज की तारीख में मायावती के सामने चुनौतियों का पहाड़ है. उनका अपना दलित वोट बैंक बिखरने लगा है. इसका एक बड़ा हिस्सा एनडीए और इंडिया गठबंधन में शिफ्ट हो गया है. इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर घटकर 9 प्रतिशत रह गया. पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को 22 फीसदी वोट मिले थे.
मायावती के साथ रहे सभी बड़े नेता अब दूसरी पार्टियों में जा चुके हैं. बस पूर्व सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ही बचे रह गए हैं. चंद्रशेखर उनके लिए धीरे धीरे चुनौती बनने लगे हैं. मायावती और चंद्रशेखर दोनों जाटव बिरादरी से हैं. ऐसे में छठी बार अध्यक्ष चुनी गईं मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीएसपी को जिंदा रखने की होगी.
मायावती क्या बसपा को बचा पाएंगी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 10 सीटों पर उपचुनाव होना है. इस चुनाव को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. जिसके लिए सभी दलों ने कमर कस ली है. बसपा ने भी उपचुनाव लड़ने की घोषणा की है. बसपा काफी समय बाद चुनाव के मैदान में उतर रही है. लखनऊ में पार्टी की बैठक इसकी रणनीति बनाने के लिए चर्चा हुई है. उपचुनाव के नतीजे बसपा के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकते हैं, क्योंकि बसपा उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा में लगभग शून्य की स्थिति में पहुंच गई है. आइए देखते है कि बसपा किस तरह की रणनीति पर काम कर रही है.
उत्तर प्रदेश में कैसी है बसपा की हालत
बसपा 2012 के बाद से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है.जिस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार चलाई है, उसका मात्र एक विधायक ही विधानसभा में है.हालत यह है कि प्रदेश में 2007 के बाद से बसपा का प्रदर्शन लगातार खराब होता जा रहा है. उत्तर प्रदेश के वोटों में कभी 30 फीसदी से अधिक का हिस्सा रखने वाली बसपा का हिस्सा अब करीब 13 फीसदी रह गया है. इस हालत ने पार्टी में बेचैनी पैदा कर दी है. इससे निपटने के लिए बसपा ने उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है. इससे पहले बसपा ने विधानसभा का उपचुनाव तब लड़ा था, जब 2007 से 2012 के दौरान उत्तर प्रदेश में उसकी बहुमत की सरकार थी. बसपा ने 2012 के बाद यूपी में विधानसभा का उपचुनाव नहीं लड़ा है.